छापा

अजब है त्रिकुटका घाट । जोत लगी घनदाट । धुंडले ना ओही बात । पलख जोत लगी ॥ १ ॥

उडवत चवरंग गुलाल । झमकर हे जोत ही लाल । महाकरण महाल । बिचमे लाल चमकत है ॥ २ ॥

चमक लगी दिनरात । नहीं कुछ आदि अंत । समजलेना ओही बात । सहज संग बतावे ॥ ३ ॥

खिजमत करले कछु काम । अजमत पावोगे राम । भ्रमर गुंफामें राम । रामनाम सुमरले ॥ ४ ॥

सुमरलेना नहीं मंत्र । छांडदे सब तंत्र । अनुहात जंत्र । धिमक मृदंग बजावे ॥ ५ ॥

बजावे धन् धन् धन् स्वरका बीन । भजन करले संगीन । नयन जागे रातदीन । ब्रह्म ताल लगावे ॥ ६ ॥

लगावे जो है तयार । करले दिलमों करार । हो जा भवजल पार । मेरे सद्‍गुरु साहेबकी ॥ ७ ॥

साहेब सद्‍गुरु जनार्दनके प्रतिपाल । एकनाथ तुम्हारे । फकीर में रहता है ॥ ८ ॥

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