बुलबुल

लखो बुलबुल है । दावोजी मुबारखो ॥ ध्रु० ॥

झटा तेरा जप भात रोटी गप । सद्‍गुरुमें छप । तुझ काल करेगा गप ॥ १ ॥

लगो मुख लिया नाम । आंदर भरा है काम । ऐसा केंव हुवा बेफाम । तुझ कांहा मिलेगा राम ॥ २ ॥

मोकूं आंगकूं लगाया राख दिलमो नापाक । ऐसा देखे लख । एका जनादर्नीं देख ॥ ३ ॥

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