संत निवृत्तीनाथांचे अभंग

चेतवि चेतवि सावधान जिवीं । प्रकृति मांडवी लग्न वोजा ॥ १ ॥

मातृका मायानिवेदन हरि । प्रपंचबोहरि रामनामें ॥ २ ॥

निवृत्तिदेवीं अद्वैत परणिली शक्ति । निरंतर मुक्ति हरि नामें ॥ ३ ॥

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