category 'करुणात्रिपदी'

३

जय करुणाघन निजजनजीवन। अनसूयानन्‍दन पाहि जनार्दन।।ध्रु।।

२

रीगुरुदत्ता जय भगवंता। ते मन निष्ठुर न करी आता।।ध्रु।।

 १

शांत हो श्रीगुरुदत्ता। मम चित्ता शमवी आता।।ध्रु।। तू केवळ माता जनिता। सर्वथा तू हितकर्ता।। तू आप्तस्वजन भ्राता। सर्वथा तूचि त्राता।। भयकर्ता तू भयहर्ता। दंडधर्ता तू परिपाता। तुजवाचुनि न दुजी वार्ता।...