category 'विष्णुपुराण प्रथम सर्ग Vishnu Puran'

श्रीविष्णुपुराण - प्रथम अंश - अध्याय २०

श्रीविष्णुपुराण - प्रथम अंश - अध्याय २०

श्रीपराशरजी बोले- हे द्विज ! इस प्रकर भगवान् विष्णुको अपनेसे अभिन्न चिन्तन करते करते पूर्ण तन्मयता प्राप्त हो जानेसे उन्होंने अपनेको अच्यतु रूप ही अनुभव किया ॥१॥ वे अपने आपको...

श्रीविष्णुपुराण - प्रथम अंश - अध्याय १९

श्रीविष्णुपुराण - प्रथम अंश - अध्याय १९

श्रीपराशरजी बोले - हिरण्यकशिपुने कृत्याको भी विफल हुई सुन अपने पुत्र प्रह्लादको बुलाकर उनके इस प्रभावका कारण पूछा ॥१॥ हिरण्यकशिपु बोला - अरे प्रह्लाद ! तु बड़ा प्रभावशाली है !...

श्रीविष्णुपुराण - प्रथम अंश - अध्याय १८

श्रीविष्णुपुराण - प्रथम अंश - अध्याय १८

श्रीपराशर उवाच तस्यैतां दनावाश्चेष्टां दृष्टा दैत्यपतेर्भयात् । आचचख्युः स चोवाच सूदानाहूय सत्वरः ॥१॥ हिरण्यकशिपुरुवाच हे सूदा मम पुत्रोऽसावन्यषामपि दुर्मतिः । कुमार्गदेशिको दुष्टो हन्यतामविलम्बितम् ॥२॥ हालाहलं विषं तस्य सर्वभक्षेषु दीयताम् ।...

श्रीविष्णुपुराण - प्रथम अंश - अध्याय १७

श्रीविष्णुपुराण - प्रथम अंश - अध्याय १७

श्रीपराशरजी बोले - हे मैत्रेय ! उन सर्वदा उदारचरित परमबुद्धिमान् महात्मा प्रह्लादजीका चरित्र तुम ध्यानपूर्वक श्रवण करो ॥१॥ पूर्वकालमें दितिके पुत्र महाबली हिरण्यकशिपुने, ब्रह्माजीके वरसे गर्वयुक्त ( सशक्त ) होकर...

श्रीविष्णुपुराण - प्रथम अंश - अध्याय १६

श्रीविष्णुपुराण - प्रथम अंश - अध्याय १६

श्रीमैत्रेयजी बोले - आपने महात्मा मनुपुत्रोंके वंशोंका वर्णन किया और यह भी बताया कि इस जगत्‌के सनातन कारण भगवान् विष्णु ही हैं ॥१॥ किन्तु भगवान् ! अपने जो कहा दैत्यश्रेष्ठ...

श्रीविष्णुपुराण - प्रथम अंश - अध्याय १५

श्रीविष्णुपुराण - प्रथम अंश - अध्याय १५

श्रीपराशरजी बोले - प्रचेताओंके तपस्यामें लगे रहनेसे ( कृषि आदिद्वारा ) किसी प्रकारकी रक्षा न होनेके कारण पृथिवीको वृक्षोंने ढँक लिया और प्रजा बहुत कुछ नष्ट हो गयी ॥१॥ आकाश...

श्रीविष्णुपुराण - प्रथम अंश - अध्याय १४

श्रीविष्णुपुराण - प्रथम अंश - अध्याय १४

श्रीपराशरजी बोले - हे मैत्रेय ! पृथुके अन्तद्धीन और वादी नामक दो धर्मज्ञ पुत्र हुए, उनमेंसे अन्तर्द्धानसे उसकी पत्नी शिखण्डिनीने हविर्धानको उप्तन्न किया ॥१॥ हविर्धानसे अग्निकुलीना धिषणाने प्राचीनबर्हि, शुक्र, गय,...

श्रीविष्णुपुराण - प्रथम अंश - अध्याय १३

श्रीविष्णुपुराण - प्रथम अंश - अध्याय १३

श्रीपराशरजी बोले - हे मैत्रेय ! ध्रुवसे ( उसकी पत्नीने ) शिष्टि और भव्यको उत्पन्न किया और भव्यसे शम्भुका जन्म हुआ तथा शिष्टिके द्वारा उसकी पत्नी सुच्छायाने रिपु, रिपुत्र्जय, विप्र,...

श्रीविष्णुपुराण - प्रथम अंश - अध्याय १२

श्रीविष्णुपुराण - प्रथम अंश - अध्याय १२

श्रीपराशरजी बोले - हे मैत्रेय ! यह सब सुनकर राजपुत्र ध्रुव उन ऋषियोंको प्रणामकर उस वनसे चल दिया ॥१॥ और हे द्विज ! अपनेको कृतकृत्य सा मानकर वह यमुनातटवर्ती अति...

श्रीविष्णुपुराण - प्रथम अंश - अध्याय ११

श्रीविष्णुपुराण - प्रथम अंश - अध्याय ११

श्रीपराशरजी बोले - हे मैत्रेय ! मैंने तुम्हें स्वायम्भूवमनुके प्रियव्रत एवं उत्तानपाद नामक दो महाबलवान् और धर्मज्ञ पुत्र बतलाये थे ॥१॥ हे ब्रह्मन ! उनमेंसे उत्तानपादकी प्रेयसी पत्नी सुरुचिसे पिताका...

श्रीविष्णुपुराण - प्रथम अंश - अध्याय ११

श्रीविष्णुपुराण - प्रथम अंश - अध्याय ११

श्रीपराशरजी बोले - हे मैत्रेय ! मैंने तुम्हें स्वायम्भूवमनुके प्रियव्रत एवं उत्तानपाद नामक दो महाबलवान् और धर्मज्ञ पुत्र बतलाये थे ॥१॥ हे ब्रह्मन ! उनमेंसे उत्तानपादकी प्रेयसी पत्नी सुरुचिसे पिताका...

श्रीविष्णुपुराण - प्रथम अंश - अध्याय १०

श्रीविष्णुपुराण - प्रथम अंश - अध्याय १०

श्रीमैत्रेयजी बोले - हे मुने ! मैंने आपसे जो कुछ पूछा था वह सब आपने वर्णन कियाः अब भृगुजीकी सन्तानसे लेकर सम्पूर्ण सृष्टिका आप मुझसे फिर वर्णन कीजिये ॥१॥ श्रीपराशरजी...

श्रीविष्णुपुराण - प्रथम अंश - अध्याय ९

श्रीविष्णुपुराण - प्रथम अंश - अध्याय ९

श्रीपराशरजी बोले- हे मैत्रेय ! तुमने इस समय मुझसे जिसके विषयमें पूछा है वह श्रीसम्बन्ध ( लक्ष्मीजीका इतिहास ) मैंने भी मरीचि ऋषिसे सुना था, वह मैं तुम्हें सुनाता हूँ,...

श्रीविष्णुपुराण - प्रथम अंश - अध्याय ८

श्रीविष्णुपुराण - प्रथम अंश - अध्याय ८

श्रीपराशरजी बोले- हे महामुने ! मैंने तुमसे ब्रह्माजीके तामस सर्गका वर्णन किया, अब मैं रुद्रसर्गका वर्णण करता हूँ, सो सुनो ॥१॥ कल्पके आदिमे अपने समान पुत्र उप्तन्न होनेके लिये चिन्तन...

श्रीविष्णुपुराण - प्रथम अंश - अध्याय ७

श्रीविष्णुपुराण - प्रथम अंश - अध्याय ७

श्रीपराशरजी बोले- फिर उन प्रजापतिके ध्यान करनेपर उनके देहस्वरूप भूतोंसे उप्तन्न हुए शरीर और इन्द्रियोंके सहित मानस प्रजा उप्तन्न हुई । उस समय मतिमान् ब्रह्माजीके जड शरीरसे ही चेतन जीवोंका...

श्रीविष्णुपुराण - प्रथम अंश - अध्याय ६

श्रीविष्णुपुराण - प्रथम अंश - अध्याय ६

श्रीमैत्रेयजी बोले- हे भगवान् ! आपने जो अर्वाक् स्त्रोता मनुष्योंके विषयमें कहा उनकी सृष्टि ब्रह्माजीने किस प्रकार की यह विस्तारपूर्वक कहिये ॥१॥ श्रीप्रजापतिने ब्राह्मणादि वर्णको जिन जिन गुणोंसे युक्त और...

श्रीविष्णुपुराण - प्रथम अंश - अध्याय ५

श्रीविष्णुपुराण - प्रथम अंश - अध्याय ५

श्रीमैत्रेयजी बोले- हे द्विजराज ! सर्गके आदिमें भगवान् ब्रह्माजीने पृथिवी, आकाश और जल आदिमें रहनेवाले देव, ऋषि, पितृगण, दानव, मनुष्य, तिर्यक और वृक्षादिको जिस प्रकार रचा तथा जैसे गुण, स्वभाव...

श्रीविष्णुपुराण - प्रथम अंश - अध्याय ४

श्रीविष्णुपुराण - प्रथम अंश - अध्याय ४

श्रीमैत्रेय बोले - हे महामुने ! कल्पके आदिमें नारायणाख्य भगवान् ब्रह्माजीने जिस प्रकार समस्त भूतोंकी रचना की वह आप वर्णन किजिये ॥१॥ श्रीपराशरजी बोले- प्रजापतियोंके स्वामी नारायणस्वरूप भगवान् ब्रह्माजीने जिस...

श्रीविष्णुपुराण - प्रथम अंश - अध्याय ३

श्रीविष्णुपुराण - प्रथम अंश - अध्याय ३

श्रीमैत्रेयजी बोले- हे भगवन् ! जो ब्रह्म, निर्गुण, अप्रमेय, शुद्ध और निर्मलात्मा है उसका सर्गादिका कर्त्ता होना कैसे सिद्ध हो सकता है ? ॥१॥ श्रीपराशरजी बोले-हे तपस्वियोंमें श्रेष्ठ मैत्रेय !...

श्रीविष्णुपुराण - प्रथम अंश - अध्याय २

श्रीविष्णुपुराण - प्रथम अंश - अध्याय २

श्रीपराशरजी बोले- जो ब्रह्म, विष्णु और शंकररूपसे जगत्‌की उप्तत्ति, स्थिति और संहारके कारण हैं तथा अपने भक्तोंको संसार-सागरसे तारनेवाले हैं, उन विकाररहित, शुद्ध, अविनाशी, परमात्मा, सर्वदा एकरस, सर्वविजयी भगवान् वासुदेव...

श्रीविष्णुपुराण - प्रथम अंश - अध्याय १

श्रीविष्णुपुराण - प्रथम अंश - अध्याय १

ग्रन्थका उपोद्‌घात श्रीसूतजी बोले- मैत्रेयजीने नित्यकर्मोंसे निवृत्त हुए मुनिवर पराशरजीको प्रणाम कर एवं उनके चरण छूकर पूछा ॥१॥ “हे गुरुदेव ! मैंने आपहीसे सम्पूर्ण वेद, वेदांग और सकल धर्मशास्त्रोंका क्रमशः...