category 'श्रीनारदपुराण - पूर्वभाग'

द्वितीय पाद - संहिताप्रकरण

द्वितीय पाद - संहिताप्रकरण

( सनन्दनजी बोले — ) नारदजी ! चैत्रादि मासोंमें क्रमश : मेषादि राशियोंमें सूर्यकी संक्रान्ति होती है । चैत्र शुक्ल प्रतिपदाके आरम्भमें जो वार ( दिन ) हो , वही...

द्वितीय पाद - त्रिस्कन्ध ज्यौतिषका जातकस्कन्ध

द्वितीय पाद - त्रिस्कन्ध ज्यौतिषका जातकस्कन्ध

सनन्दनजी कहते हैं — नारद ! मेष आदि राशियाँ कालपुरुषके क्रमश : मस्तक , मुख , बाहु , ह्रदय , उदर , कटि , वस्ति ( पेंडू ), लिङ्ग ,...

द्वितीय पाद - त्रिस्कन्ध ज्यौतिषके वर्णन

द्वितीय पाद - त्रिस्कन्ध ज्यौतिषके वर्णन

सनन्दन उवाच ज्यौतिषाङ्गं प्रवक्ष्यामि यदुक्तं ब्रह्मणा पुरा । यस्य विज्ञानमात्रेण धर्मसिद्धिर्भवेन्नृणाम्‌ ॥१॥ त्रिस्कन्धं ज्यौतिषं शास्त्रं चतुर्लक्षमुदाह्रतम्‌ । गणितं जातकं विप्र संहितास्कन्धसंज्ञितम्‌ ॥२॥ गणिते परिकर्माणि खगमध्यस्फुटक्रिये । अनुयोगश्चन्द्रसूर्यग्रहणं चोदयास्तकम्‌ ॥३॥ छाया...

द्वितीय पाद - निरुक्त-वर्णन

द्वितीय पाद - निरुक्त-वर्णन

सनन्दनजी कहते हैं — अब मैं निरुक्तका वर्णन करता हूँ , जो वेदका कर्णरूप उत्तम अङ्ग है । यह वैदिक धातुरूप है , इसे पाँच प्रकारका बताया गया है ॥१॥...

द्वितीय पाद - व्याकरण शास्त्रका वर्णन

द्वितीय पाद - व्याकरण शास्त्रका वर्णन

व्याकरण - शास्त्रका वर्णन सनन्दन उवाच अथ व्याकरणं वक्ष्ये संक्षेपात्तव नारद । सिद्धरूपप्रबन्धेन मुखं वेदस्य साम्प्रतम्‌ ॥१॥ सनन्दनजी कहते हैं — अब मैं शब्दोंके सिद्धरूपोंका उल्लेख करते हुए तुमसे संक्षेपमें...

द्वितीय पाद - कल्पका वर्णन

द्वितीय पाद - कल्पका वर्णन

वेदके द्वितीय अङ्ग कल्पका वर्णन - गणेशपूजन , ग्रहशान्ति तथा श्राद्धका निरूपण सनन्दनजी कहते है—मुनीश्वर ! अब मैं कल्पग्रन्थका वर्णन करता हूँ ; जिसके विज्ञानमात्रसे मनुष्य कर्ममें कुशल हो जाता...

द्वितीय पाद - शिक्षा-निरूपण

द्वितीय पाद - शिक्षा-निरूपण

सूतजी कहते हैं — सनन्दनजीका ऐसा वचन सुनकर नारदजी अतृप्त - से रह गये । वे और भी सुननेके लिये उत्सुक होकर भाई सनन्दनजीसे बोले । नारदजीने कहा — भगवन्‌...

द्वितीय पाद - अद्वैतज्ञानका उपदेश

द्वितीय पाद - अद्वैतज्ञानका उपदेश

जडभरत और सौवीरनरेशका संवाद - परमार्थका निरूपण तथा ऋभुका निदाघको अद्वैतज्ञानका उपदेश सनन्दनजी कहते हैं — नारदजी ! ब्राह्मणका परमार्थयुक्त वचन सुनकर सौवीर - नरेशने विनयसे नम्र होकर कहा ।...

द्वितीय पाद - जडभरत और सौवीरनरेशका संवाद

द्वितीय पाद - जडभरत और सौवीरनरेशका संवाद

राजा भरतका मृगशरीरमें आसक्तिके कारण मृग होना , फिर ज्ञानसम्पन्न ब्राह्मण होकर जडवृत्तिसे रहना , जडभरत और सौवीरनरेशका संवाद नारदजी बोले — महाभाग ! मैंने आध्यात्मिक आदि तीनों तापोंकी चिकित्साका...

द्वितीय पाद - मुक्तिप्रद योगका वर्णन

द्वितीय पाद - मुक्तिप्रद योगका वर्णन

सनन्दनजी कहते हैं — नारदजी ! केशिध्वजके इस अध्यात्मज्ञानसे युक्त अमृतमय वचनको सुनकर खाण्डिक्यने पुन : उन्हें प्रेरित करते हुए कहा । खाण्डिक्य बोले — योगवेत्ताओंमें श्रेष्ठ महाभाग केशिध्वज !...

द्वितीय पाद - त्रिविध तापोंसे छूटनेका उपाय

द्वितीय पाद - त्रिविध तापोंसे छूटनेका उपाय

त्रिविध तापोंसे छूटनेका उपाय , भगवान् ‌‍ तथा वासुदेव आदि शब्दोंकी व्याख्या , परा और अपरा विद्याका निरूपण , खाण्डिक्य और केशिध्वजकी कथा , केशिध्वजद्वारा अविद्याके बीजका प्रतिपादन सूतजी कहते...

द्वितीय पाद - ध्यानयोगका वर्णन

द्वितीय पाद - ध्यानयोगका वर्णन

भरद्वाजजी बोले - महर्षे ! इस लोकसे उत्तम एक लोक यानी प्रदेश सुना जाता है । मैं उस उत्तम लोकको जानना चाहता हूँ । आप उसके विषयमें बतलानेकी कृपा करें...

द्वितीय पाद - सृष्टितत्त्वका वर्णन

द्वितीय पाद - सृष्टितत्त्वका वर्णन

श्रीनारदजीने पूछा - सनन्दनजी ! इस स्थावर - जङ्रमरूप जगत्‌की उत्पत्ति किससे हुई है और प्रलयके समय यह किसमें लीन होता है ? श्रीसनन्दनजी बोले - नारदजी ! सुनो ,...

प्रथम पाद - मासोपवास-व्रतकी विधि

प्रथम पाद - मासोपवास-व्रतकी विधि

मासोपवास -व्रतकी विधि और महिमा श्रीसनकजी कहते हैं - नारदजी ! अब मैं मासोपवास नामक दूसरे श्रेष्ठ व्रतका वर्णन करूँगा ; एकाग्रचित्त होकर सुनिये। वह सब पापोंको हर लेनेवाला ,...

प्रथम पाद - हरिपञ्चक-व्रतकी विधि

प्रथम पाद - हरिपञ्चक-व्रतकी विधि

हरिपञ्चक -व्रतकी विधि और माहात्म्य श्रीसनकजी कहते हैं - नारदजी ! अब मैं दूसरे व्रतका यथार्थरूपसे वर्णन करता हूँ , सुनिये। यह व्रत हरिपञ्चक नामसे प्रसिद्ध है और सम्पूर्ण लोकोंमें...

प्रथम पाद - ध्वजारोपणकी विधि

प्रथम पाद - ध्वजारोपणकी विधि

श्रीविष्णुमन्दिरमें ध्वजारोपणकी विधि और महिमा श्रीसनकजी कहते हैं - नारदजी ! अब मैं ध्वजारोपण नामक दूसरे व्रतका वर्णन करूँगा , जो सब पापोंको हर लेनेवाला , पुण्यस्वरूप तथा भगवान् ‌‍...

प्रथम पाद - लक्ष्मीनारायण व्रत

प्रथम पाद - लक्ष्मीनारायण व्रत

मार्गशीर्ष -पूर्णिमासे आरम्भ होनेवाले लक्ष्मीनारायण -व्रतकी उद्यापनसहित विधि और महिमा श्रीसनकजी कहते है - मुनिश्रेष्ठ ! अब मैं दूसरे उत्तम व्रतका वर्णन करता हूँ सुनिये। वह सब पापोंको दूर करनेवाला...

प्रथम पाद - द्वादशीव्रतका वर्णन

प्रथम पाद - द्वादशीव्रतका वर्णन

मार्गशीर्ष माससे लेकर कार्तिक मासपर्यन्त उद्यापनसहित शुक्लपक्षके द्वादशीव्रतका वर्णन ऋषि बोले - महाभारा सूतजी ! आपको साधुवाद है। आपका हृदय अत्यन्त दयालु है। आपने कृपा करके सब पापोंका नाश करनेवाला...

प्रथम पाद - द्वादशीव्रतका वर्णन

प्रथम पाद - द्वादशीव्रतका वर्णन

मार्गशीर्ष माससे लेकर कार्तिक मासपर्यन्त उद्यापनसहित शुक्लपक्षके द्वादशीव्रतका वर्णन ऋषि बोले - महाभारा सूतजी ! आपको साधुवाद है। आपका हृदय अत्यन्त दयालु है। आपने कृपा करके सब पापोंका नाश करनेवाला...

प्रथम पाद - सत्संग-लाभ

प्रथम पाद - सत्संग-लाभ

राजा भगीरथका भृगुजीके आश्रमपर जाकर स त्संग - लाभ करना तथा हिमालयपर घोर तपस्या करके भगवान् ‍ विष्णु और शिवकी कृपासे गंगा जीको लाकर पितरोंका उद्धार करना नारदजीने पूछा –...

प्रथम पाद - विविध प्रायश्चित्तका वर्णन

प्रथम पाद - विविध प्रायश्चित्तका वर्णन

विविध प्रायश्चित्तका वर्णन , इष्टापूर्त्तका फल और सूतक , श्राद्ध तथा तर्पणका विवेचन धर्मराज कहते हैं - नृपश्रेष्ठ ! अब मैं चारों वर्णोंके लिये वेदों और स्मृतियोंमें बताये हुए धर्मका...

प्रथम पाद - तुलसी महिमा

प्रथम पाद - तुलसी महिमा

तडाग और तुलसी आदिकी महि मा , भगवान् ‌‍ विष्णु और शिवके स्नान -पूजनका महत्त्व एवं विविध दानों तथा देवमन्दिरमें सेवा करनेका माहात्म्य धर्मराज कहते हैं - राजन् ‌‍ !...

प्रथम पाद - दानका पात्र

प्रथम पाद - दानका पात्र

दानका पात्र , निष्फल दान , उत्तम -मध्यम -अधम दान , धर्मराज -भगीरथ -संवाद , ब्राह्यणको जीविकादानका माहात्म्य तथा तडाग -निर्माणजनित पुण्यके विषयमें राजा वीरभद्रकी कथा नारदजी बोले - भाईजी...

प्रथम पाद - अदितिको भगवद्दर्शन

प्रथम पाद - अदितिको भगवद्दर्शन

अदितिको भगवद्दर्शन और वरप्राप्ति , वामनजीका अवतार , बलि -वामन -संवाद , भगवान्‌‍का तीन पैरसे समस्त ब्रह्याण्डको लेकर बलिको रसातल भेजना नारदजीने पूछा - भाईजी ! आपने यह बड़ी अद्धत...

प्रथम पाद - देवताओंकी पराजय

प्रथम पाद - देवताओंकी पराजय

बलिके द्वारा देवताओंकी पराजय तथा अदितिकी तपस्या नारदजीने कहा - भाईजी ! यदि मैं आपकी कृपाका पात्र होऊँ तो भगवान् ‌‍ विष्णुके चरणोंके अग्रभावसे उप्तन्न हुई जो गंगा बतायी जाती...

प्रथम पाद - सगरका जन्म

प्रथम पाद - सगरका जन्म

सगरका जन्म तथा शत्रुविजय , कपिलके क्रोधसे सगर - पुत्रोंका विनाश तथा भगीरथद्वारा लायी हुई गंगाजीके स्पर्शसे उन सबका उद्धार श्रीसनकजी कहते हैं - मुनीश्वर ! इस प्रकार राजा बाहुकी...

प्रथम पाद - राजा बाहुकी अवनति

प्रथम पाद - राजा बाहुकी अवनति

असूया - दोषके कारण राजा बाहुकी अवनति और पराजय तथा उनकी मृत्युके बाद रानीका और्व मुनिके आश्रममें रहना नारदजीने पूछा - मुनिश्रेष्ठ ! राजा सगर कौन थे ? वह सब...

प्रथम पाद - गंगा यमुना संगम

प्रथम पाद - गंगा यमुना संगम

गंगा - यमुना - संगम , प्रयाग , काशी तथा गंगा एवं गायत्रीकी महिमा सूतजी कहते हैं - भगवान‌‍की भक्तिका यह माहात्म्य सुनकर नारदजी बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने ज्ञान -...

प्रथम पाद - भगवानकी स्तुति

प्रथम पाद - भगवानकी स्तुति

मार्कण्डेयजीको पिताका उपदेश , समय - निरुपणा , मार्कण्डेयद्वारा भगवानकी स्तुति और भगवानका मार्कंण्डेयजीको भगवद्भक्तोंके लक्षण बताकर वरदान देना नारदजीने पूछा - ब्रह्मन् ‍ । पुराणोंमे यह सुना जाता है...

प्रथम पाद - सत्सड्गकी माहिमा

प्रथम पाद - सत्सड्गकी माहिमा

श्रध्दा - भक्ति , वर्णाश्रमोचित आचार तथा सत्सड्गकी माहिमा , मॄकण्डु मुनिकी तपस्यासे संतुष्ट होकर भगवानका मुनिको दर्शन तथा वरदान देना श्रीसनकजी कहते हैं - नारद। श्रद्धापूर्वक आचरणमें लाये हुए...

प्रथम पाद - सृष्टिक्रमका संक्षिप्त वर्णन

प्रथम पाद - सृष्टिक्रमका संक्षिप्त वर्णन

सृष्टिक्रमका संक्षिप्त वर्णन ; द्वीप , समुद्र और भारतवर्षका वर्णन , भारतमें सत्कर्मानुष्ठानकी महत्ता तथा भगवदर्पणपूर्वक कर्म करनेकी आज्ञा नारदजीने पूछा – सनकजी ! आदिदेव भगवान् ‌‍ विष्णुने पूर्वकालमें ब्रह्या...

प्रथम पाद - विष्णुकी स्तुति

प्रथम पाद - विष्णुकी स्तुति

नारदजीद्वारा भगवान् ‌ विष्णुकी स्तुति ऋषियोंने पूछा – सूतजी ! सनत्कुमारजीने महात्मा नारदको किस प्रकार सम्पूर्ण धर्मोंका उपदेश किया तथा उन दोनोंका समागम किस तरह हुआ ? वे दोनों ब्रह्यवादी...

प्रथम पाद - सूतजीसे प्रश्न

प्रथम पाद - सूतजीसे प्रश्न

सिद्धाश्रममें शौनकादि महर्षियोंका सूतजीसे प्रश्न तथा सूतजीके द्वारा नारदपुराणकी महिमा और विष्णुभक्तिके माहात्म्यका वर्णन ॐ वेदव्यासाय नमः नारायणं नमस्कृत्य नरं चैव नरोत्तमम्‌‍। देवीं सरस्वतीं चैव ततो जयमुदीरयेत् ‌‍ ॥१॥ भगवान्...