category 'श्रीविष्णुपुराण - चतुर्थ अंश'

श्रीविष्णुपुराण - चतुर्थ अंश - अध्याय १३

श्रीविष्णुपुराण - चतुर्थ अंश - अध्याय १३

श्रीपराशरजी बोले सत्वतके भजन, भजमान, दिव्य, अन्धक, देवावृध महाभोज और वृष्णि नामक पुत्र हुए ॥१॥ भजमनाके निमि, कृकण और वृष्णि तथ इनके तीन सौतेले भाइ शतजित सहस्त्रजित् और अयुतजित- ये...

श्रीविष्णुपुराण - चतुर्थ अंश - अध्याय १२

श्रीविष्णुपुराण - चतुर्थ अंश - अध्याय १२

श्रीपराशरजी बोले - यदुपुत्र क्रोष्टुके ध्वजिनीवान् नामक पुत्र हुआ ॥१॥ उसके स्वाति, स्वातिके रुशंकु, रुशंकुके चित्ररथ और चित्ररथके शशिबिन्दु नामक पुत्र हुआ जो चौदहों महारत्नोका * स्वामी तथा चक्रवर्ती सम्राट...

श्रीविष्णुपुराण - चतुर्थ अंश - अध्याय ११

श्रीविष्णुपुराण - चतुर्थ अंश - अध्याय ११

श्रीपराशरजी बोले - अब मैं ययातिके प्रथम पुत्र यदुके वंशका वर्णन करत हूँ, जिसमें कि मनुष्य, सिद्ध गन्धर्व, यक्ष, राक्षस गृह्याक, किंपुरुष, अप्सरा, सर्प, पक्षी, दैत्य, दानव, आदित्य, रुद्र, वसु,...

श्रीविष्णुपुराण - चतुर्थ अंश - अध्याय १०

श्रीविष्णुपुराण - चतुर्थ अंश - अध्याय १०

श्रीपराशरजी बोले नहुषके यति, ययाति, संयाति, आयति, वियाति और कृति नामक छः महाबल - विक्रमशाली पुत्र हुए ॥१॥ यतिने राज्यकी इच्छा नहीं की, इसलिये ययाति ही राजा हुआ ॥२-३॥ ययातिने...

श्रीविष्णुपुराण - चतुर्थ अंश - अध्याय ९

श्रीविष्णुपुराण - चतुर्थ अंश - अध्याय ९

श्रीपराशरजी बोले रजिके अतुलित बलपराक्रमशाली पाँच सौ पुत्र थे ॥१॥ एक बार देवासुरसंग्रामके आरम्भके एक - दुसरेकी मारनेकी इच्छावाले देवता और दैत्योंने ब्रह्माजीके पास जाकर पूछा- “ भगवान् ! हम...

श्रीविष्णुपुराण - चतुर्थ अंश - अध्याय ८

श्रीविष्णुपुराण - चतुर्थ अंश - अध्याय ८

श्रीपराशरजी बोले - आयु नामक जो पुरुरवाका ज्येष्ठ पुत्र था उसने राहुकी कन्यासे विवाह किया ॥१॥ उससे उसके पाँच पुत्र हुए जिनके नाम क्रमशः नहुष, क्षत्रवृद्ध, रभ्म, रजि और अनेना...

श्रीविष्णुपुराण - चतुर्थ अंश - अध्याय ७

श्रीविष्णुपुराण - चतुर्थ अंश - अध्याय ७

श्रीपराशरजी बोले राजा पुरूरवाके परम बुद्धिमान आयु, अमावसु, विश्वावसु, श्रुतायु, शतायु और अयुतायु नामक छः पुत्र हुए ॥१॥ अमावसुके भीम, भीमके कात्र्जन, कात्र्जनके सुहोत्र और सुहोत्रके जह्नु, नामक पुत्र हुआ...

श्रीविष्णुपुराण - चतुर्थ अंश - अध्याय ६

श्रीविष्णुपुराण - चतुर्थ अंश - अध्याय ६

मैत्रेयजी बोले - भगवन् ! आपने सूर्यवंशीय राजाओंका वर्णन तो कर दिया, अब मैं सम्पूर्ण चन्द्रवंशीय भूपतियोंकी वृतान्त भी सुनना चाहता हूँ । जिन स्थिरकीर्ति महराजोंकी सन्तातिका सुयश आज भी...

श्रीविष्णुपुराण - चतुर्थ अंश - अध्याय ५

श्रीविष्णुपुराण - चतुर्थ अंश - अध्याय ५

श्रीपराशरजी बोले - इक्ष्वाकुका जो निमि नामक पुत्र था उसने एक सहस्त्रवर्षमें समाप्त होनेवाले यज्ञका आरभ्म किया ॥१॥ उस यज्ञमें उसने वसिष्ठजीको होता वरण किया ॥२॥ वसिष्ठजीने उससे कहा कि...

श्रीविष्णुपुराण - चतुर्थ अंश - अध्याय ४

श्रीविष्णुपुराण - चतुर्थ अंश - अध्याय ४

श्रीपराशरजी बोले - काश्यपसुता सुमति और विदर्भराज - कन्या केशिनी ये राजा सगरकी दो स्त्रियाँ थीं ॥१॥ उनसे सन्तानोप्तत्तिके लिये परम समाधिद्वारा आराधना किये जानेपर भगवान् और्वने यह वह दिया...

श्रीविष्णुपुराण - चतुर्थ अंश - अध्याय ३

श्रीविष्णुपुराण - चतुर्थ अंश - अध्याय ३

अब हम मान्धाताके पुत्रोंकी सन्तानका वर्णन करते हैं ॥१॥ मान्धाताके पुत्र अम्बरीषके युवनाश्च नामक पुत्र हुआ ॥२॥ उससे हारीत हुआ जिससे अंगिरा- गोत्रीय हरीतगण हुए ॥३॥ पूर्वकालमें रसातलमें मौनेय नामक...

श्रीविष्णुपुराण - चतुर्थ अंश - अध्याय २

श्रीविष्णुपुराण - चतुर्थ अंश - अध्याय २

श्रीपराशरजी बोले - जिस समय रैवत ककुद्मी ब्रह्मालोकसे लौटकर नहीं आये थे उसी समय पुण्यजन नामक राक्षसोंने उनकी पुरी कुशस्थलीका ध्वंस कर दिया ॥१॥ उनके सौ भाई पुण्यजन राक्षसोंके भयसे...

श्रीविष्णुपुराण - चतुर्थ अंश - अध्याय १

श्रीविष्णुपुराण - चतुर्थ अंश - अध्याय १

श्रीमैत्रेयजी बोले - हे भगवान् ! सत्कर्ममें प्रवृत्त रहनेवाले पुरुषींको जो करने चाहिये उन सम्पूर्ण नित्यनैमित्तिक कर्मोका आपने वर्णन कर दिया ॥१॥ हे गुरो ! आपने वर्ण- धर्म और आश्रम...