चालीसा
संकलित Updated: 15 April 2021 07:30 IST

चालीसा : श्री विन्ध्येश्वरी चालीसा

यह किताब में हिंदू देवी देवताओं कि चालीसा दि गयी है| इस किताब में कृष्ण, गणेश, दुर्गा, भैरव, राम, लक्ष्मी, विघ्नेश्वर, सरस्वती, शनी, हनुमान, गायत्री, साई, वीरभद्र जैसे देवी देवताओं कि चालीसा दि गयी है।

श्री लक्ष्मी चालीसा   श्री शनि चालीसा

नमो नमो विन्ध्येश्वरी, नमो नमो जगदम्ब । सन्तजनों के काज में करती नहीं विलम्ब ॥

जय जय जय विन्ध्याचल रानी । आदि शक्ति जग विदित भवानी ॥

सिंहवाहिनी जय जग माता । जय जय जय त्रिभुवन सुखदाता ॥

कष्ट निवारिणि जय जग देवी । जय जय जय असुरासुर सेवी ॥

महिमा अमित अपार तुम्हारी । शेष सहस मुख वर्णत हारी ॥

दीनन के दुख हरत भवानी । नहिं देख्यो तुम सम कोई दानी ॥

सब कर मनसा पुरवत माता । महिमा अमित जगत विख्याता ॥

जो जन ध्यान तुम्हारो लावे । सो तुरतहि वांछित फल पावे ॥

तु ही वैष्णवी तुही रुद्राणी । तुही शारदा अरु ब्रहमाणी ॥

रमा राधिका श्यामा काली । तुही मात सन्तन प्रतिपाली ॥

उमा माधवी चण्डी ज्वाला । वेगि मोहि पर होहु दयाला ॥

तुही हिंगलाज महारानी । तुही शीतला अरु विज्ञानी ॥

दुर्गा दुर्ग विनाशिनि माता । तुही लक्ष्मी जग सुखदाता ॥

तुही जान्हवी अरु इन्द्राणी । हेमावती अम्ब निर्वाणी ॥

अष्टभुजी वाराहिनि देवी । करत विष्णु शिव जाकर सेवी ॥

पाटन मुम्बा दन्त कुमारी । भद्रकाली सुन विनय हमारी ॥

वज्रधारिणी शोक विनाशिनी । आयु रक्षिणी विन्ध्यनिवासिनी ॥

जया और विजया बैताली । मातु सुगन्धा अरु विकराली ॥

नाम अनन्त तुम्हार भवानी । बरनै किमि मानुष अज्ञानी ॥

जा पर कृपा मातु तव होई । तो वह करै चहै मन जोई ॥

कृपा करहु मो पर महारानी । सिद्घ करहु अम्बे मम बानी ॥

जो नर धरै मातु कर ध्याना । ताकर सदा होय कल्याना ॥

विपति ताहि सपनेहु नहिं आवै । जो देवी का जाप करावै ॥

जो नर कहं ऋण होय अपारा । सो नर पाठ करै शत बारा ॥

निश्चय ऋण मोचन होई जाई । जो नर पाठ करै मन लाई ॥

अस्तुति जो नर पढ़े पढ़ावै । या जग में सो अति सुख पावै ॥

जाको व्याधि सतावै भाई । जाप करत सब दूरि पराई ॥

जो नर अति बन्दी महं होई । बार हजार पाठ कर सोई ॥

निश्चय बन्दी ते छुटि जाई । सत्य वचन मम मानहु भाई ॥

जा पर जो कछु संकट होई । निश्चय देविहिं सुमिरै सोई ॥

जो नर पुत्र होय नहि भाई । सो नर या विधि करे उपाई ॥

पाँच वर्ष सो पाठ करावै । नौरातर में विप्र जिमावै ॥

निश्चय होहिं प्रसन्न भवानी । पुत्र देहि ता कहं गुणखानी ॥

ध्वजा नारियल आनि चढ़ावै । विधि समेत पूजन करवावै ॥

नितप्रति पाठ करै मन लाई । प्रेम सहित नहिं आन उपाई ॥

यह श्री विन्ध्याचल चालीसा । रंक पढ़त होवे अवनीसा ॥

यह जनि अचरज मानहुं भाई । कृपा दृष्टि ता पर होइ जाई ॥

जय जय जय जगमातु भवानी । कृपा करहुं मोहि निज जन जानी ॥


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