भजन
संकलित Updated: 15 April 2021 07:30 IST

भजन : हरि, पतित पावन सुने

भजन

प्रभु तेरो नाम   दीनबन्धु दीनानाथ, मेरी तन हेरिये

मैं हरि, पतित पावन सुने ।
मैं पतित, तुम पतित-पावन, दोउ बानक बने॥

ब्याध गनिका गज अजामिल, साखि निगमनि भने।
और अधम अनेक तारे, जात कापै गने॥

जानि नाम अजानि लीन्हें नरक जमपुर मने।
दास तुलसी सरन आयो राखिये अपने॥

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