भजन
संकलित Updated: 15 April 2021 07:30 IST

भजन : नारायण जिनके हिरदय में

भजन

घूँघट का पट खोल रे   गुरु चरनन मे शीश झुकाले

नारायण जिनके हिरदय में
सो कछु करम करे न करे रे ..

पारस मणि जिनके घर माहीं
सो धन संचि धरे न धरे .
सूरज को परकाश भयो जब
दीपक जोत जले न जले रे ..

नाव मिली जिनको जल अंदर
बाहु से नीर तरे न तरे रे .
ब्रह्मानंद जाहि घट अंतर
काशी में जाये मरे न मरे रे ..

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