भजन
संकलित Updated: 15 April 2021 07:30 IST

भजन : हे जगत्राता विश्वविधाता

भजन

हारिये न हिम्मत बिसारिये न राम   हमको मनकी शक्ति देना

हे जगत्राता विश्वविधाता हे सुखशांतिनिकेतन हे ।
प्रेमके सिंधो दीनके बंधो दुःख दरिद्र विनाशन हे ।
नित्य अखंड अनंत अनादि पूर्ण ब्रह्मसनातन हे ।
जगाअश्रय जगपति जगवंदन अनुपम अलख निरंजन हे ।
प्राण सखा त्रिभुवन प्रतिपालक जीवन के अवलंबन हे ।

. . .