प्रभु हम पे कृपा करना प्रभु हम पे दया करना ।
वैकुण्ठ तो यहीं है इसमें ही रहा करना ॥

हम मोर बन के मोहन नाचा करेंगे वन में ।
तुम श्याम घटा बनकर उस बन में उड़ा करना ॥

होकर के हम पपीहा पी पी रटा करेंगे ।
तुम स्वाति बूंद बनकर प्यासे पे दया करना ॥

हम राधेश्याम जग में तुमको ही निहारेंगे ।
तुम दिव्य ज्योति बन कर नैनों में बसा करना ॥

. . .