श्लोक
संकलित Updated: 15 April 2021 07:30 IST

श्लोक : बहुभिर्प्रलापैः किम्

श्लोक

यथा शिखा मयूराणां   यानि कानि च मित्राणि

बहुभिर्प्रलापैः किम् , त्रयलोके सचरारे ।

यद् किंचिद् वस्तु तत्सर्वम् , गणितेन् बिना न हि ॥


बहुत प्रलाप करने से क्या लभ है ? इस चराचर जगत में जो कोई भी वस्तु है वह गणित के बिना नहीं है / उसको गणित के बिना नहीं समझा जा सकता

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