श्लोक
संकलित Updated: 15 April 2021 07:30 IST

श्लोक : कर्पूर गौरम करूणावतारम

श्लोक

यानि कानि च मित्राणि   श्री महालक्ष्मी अष्टकम

करपूर गौरम करूणावतारम

संसार सारम भुजगेन्द्र हारम |

सदा वसंतम हृदयारविंदे

भवम भवानी सहितं नमामि ||


मंगलम भगवान् विष्णु

मंगलम गरुड़ध्वजः |

मंगलम पुन्डरी काक्षो

मंगलायतनो हरि ||


सर्व मंगल मांग्लयै

शिवे सर्वार्थ साधिके |

शरण्ये त्रयम्बके गौरी

नारायणी नमोस्तुते ||


त्वमेव माता च पिता त्वमेव

त्वमेव बंधू च सखा त्वमेव

त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव

त्वमेव सर्वं मम देव देव


कायेन वाचा मनसेंद्रियैर्वा

बुध्यात्मना वा प्रकृतेः स्वभावात

करोमि यध्य्त सकलं परस्मै

नारायणायेति समर्पयामि ||


श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारे

हे नाथ नारायण वासुदेव |

जिब्हे पिबस्व अमृतं एत देव

गोविन्द दामोदर माधवेती ||

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