संत साहित्य

संतांचा अर्थ असा आहे की भक्तांनी बनविलेले धार्मिक साहित्य. जो निर्गुण उपासक आहे त्याला संत म्हटले पाहिजे हे आवश्यक नाही. याअंतर्गत लोकमंगलविद्या ही सर्व सगुण-निर्गुणांकडे येते, परंतु आधुनिकांनी निर्गुण्य भक्तांना "संत" हे नाव दिले आणि आता त्या वर्गात हा शब्द सुरू झाला आहे. "संत" हा शब्द संस्कृतच्या पहिल्या "सत" चा बहुवचन रूप आहे, ज्याचा अर्थ सज्जन आणि धार्मिक व्यक्ती आहे. मराठीमध्ये साधू / सुधारक हा शब्द प्रचलित झाला. ज्ञानेश्वर, एकनाथ, तुकाराम, नामदेव इत्यादी संतांनी अभंग, भजन, गीते बनवून अगाध साहित्य निर्माण केले..

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सर्व पाने

प्रथम पाद - अदितिको भगवद्दर्शन

प्रथम पाद - अदितिको भगवद्दर्शन

अदितिको भगवद्दर्शन और वरप्राप्ति , वामनजीका अवतार , बलि -वामन -संवाद , भगवान्‌‍का तीन पैरसे समस्त ब्रह्याण्डको लेकर बलिको रसातल भेजना नारदजीने पूछा - भाईजी ! आपने यह बड़ी अद्धत...

प्रथम पाद - देवताओंकी पराजय

प्रथम पाद - देवताओंकी पराजय

बलिके द्वारा देवताओंकी पराजय तथा अदितिकी तपस्या नारदजीने कहा - भाईजी ! यदि मैं आपकी कृपाका पात्र होऊँ तो भगवान् ‌‍ विष्णुके चरणोंके अग्रभावसे उप्तन्न हुई जो गंगा बतायी जाती...

प्रथम पाद - सगरका जन्म

प्रथम पाद - सगरका जन्म

सगरका जन्म तथा शत्रुविजय , कपिलके क्रोधसे सगर - पुत्रोंका विनाश तथा भगीरथद्वारा लायी हुई गंगाजीके स्पर्शसे उन सबका उद्धार श्रीसनकजी कहते हैं - मुनीश्वर ! इस प्रकार राजा बाहुकी...

प्रथम पाद - राजा बाहुकी अवनति

प्रथम पाद - राजा बाहुकी अवनति

असूया - दोषके कारण राजा बाहुकी अवनति और पराजय तथा उनकी मृत्युके बाद रानीका और्व मुनिके आश्रममें रहना नारदजीने पूछा - मुनिश्रेष्ठ ! राजा सगर कौन थे ? वह सब...

प्रथम पाद - गंगा यमुना संगम

प्रथम पाद - गंगा यमुना संगम

गंगा - यमुना - संगम , प्रयाग , काशी तथा गंगा एवं गायत्रीकी महिमा सूतजी कहते हैं - भगवान‌‍की भक्तिका यह माहात्म्य सुनकर नारदजी बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने ज्ञान -...

प्रथम पाद - भगवानकी स्तुति

प्रथम पाद - भगवानकी स्तुति

मार्कण्डेयजीको पिताका उपदेश , समय - निरुपणा , मार्कण्डेयद्वारा भगवानकी स्तुति और भगवानका मार्कंण्डेयजीको भगवद्भक्तोंके लक्षण बताकर वरदान देना नारदजीने पूछा - ब्रह्मन् ‍ । पुराणोंमे यह सुना जाता है...

प्रथम पाद - सत्सड्गकी माहिमा

प्रथम पाद - सत्सड्गकी माहिमा

श्रध्दा - भक्ति , वर्णाश्रमोचित आचार तथा सत्सड्गकी माहिमा , मॄकण्डु मुनिकी तपस्यासे संतुष्ट होकर भगवानका मुनिको दर्शन तथा वरदान देना श्रीसनकजी कहते हैं - नारद। श्रद्धापूर्वक आचरणमें लाये हुए...

प्रथम पाद - सृष्टिक्रमका संक्षिप्त वर्णन

प्रथम पाद - सृष्टिक्रमका संक्षिप्त वर्णन

सृष्टिक्रमका संक्षिप्त वर्णन ; द्वीप , समुद्र और भारतवर्षका वर्णन , भारतमें सत्कर्मानुष्ठानकी महत्ता तथा भगवदर्पणपूर्वक कर्म करनेकी आज्ञा नारदजीने पूछा – सनकजी ! आदिदेव भगवान् ‌‍ विष्णुने पूर्वकालमें ब्रह्या...

प्रथम पाद - विष्णुकी स्तुति

प्रथम पाद - विष्णुकी स्तुति

नारदजीद्वारा भगवान् ‌ विष्णुकी स्तुति ऋषियोंने पूछा – सूतजी ! सनत्कुमारजीने महात्मा नारदको किस प्रकार सम्पूर्ण धर्मोंका उपदेश किया तथा उन दोनोंका समागम किस तरह हुआ ? वे दोनों ब्रह्यवादी...

प्रथम पाद - सूतजीसे प्रश्न

प्रथम पाद - सूतजीसे प्रश्न

सिद्धाश्रममें शौनकादि महर्षियोंका सूतजीसे प्रश्न तथा सूतजीके द्वारा नारदपुराणकी महिमा और विष्णुभक्तिके माहात्म्यका वर्णन ॐ वेदव्यासाय नमः नारायणं नमस्कृत्य नरं चैव नरोत्तमम्‌‍। देवीं सरस्वतीं चैव ततो जयमुदीरयेत् ‌‍ ॥१॥ भगवान्...

श्रीविष्णुपुराण - चतुर्थ अंश - अध्याय १३

श्रीविष्णुपुराण - चतुर्थ अंश - अध्याय १३

श्रीपराशरजी बोले सत्वतके भजन, भजमान, दिव्य, अन्धक, देवावृध महाभोज और वृष्णि नामक पुत्र हुए ॥१॥ भजमनाके निमि, कृकण और वृष्णि तथ इनके तीन सौतेले भाइ शतजित सहस्त्रजित् और अयुतजित- ये...

श्रीविष्णुपुराण - चतुर्थ अंश - अध्याय १२

श्रीविष्णुपुराण - चतुर्थ अंश - अध्याय १२

श्रीपराशरजी बोले - यदुपुत्र क्रोष्टुके ध्वजिनीवान् नामक पुत्र हुआ ॥१॥ उसके स्वाति, स्वातिके रुशंकु, रुशंकुके चित्ररथ और चित्ररथके शशिबिन्दु नामक पुत्र हुआ जो चौदहों महारत्नोका * स्वामी तथा चक्रवर्ती सम्राट...